शोर of Silence

A blog of my Poems..!!

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

यूँ-ही

इतना आसां कहाँ आपकी तारीफ़ करना
लफ़्ज़ नही मिले..हम तलाशते रह गए..!!
Posted by वीरेन्द्र प्रताप सिंह at 9:17 am कोई टिप्पणी नहीं:
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