रविवार, 28 अप्रैल 2013

ये जो ख़ामोशी है ..

ख़ामोशी कौन है?
कभी पूछों उससे
वो कैसे बताएगी ?
राज़ सारे अपने साये में छिपाएगी
उसकी आवाज में चींख है पर वो सुनाई न देगी
इक गहरी सोच है वो जो दिखाई न देगी
कभी ख़ुशी में आखों से आती है ख़ामोशी
कभी दर्द में मुस्करा जाती है ख़ामोशी
चुप रहकर सबकुछ सुनती है ख़ामोशी
चुप रहकर ही सबको सुनाती है ख़ामोशी
हर अबूझ सवाल का जवाब है ख़ामोशी
हर अनजान की पहचान है ये ख़ामोशी
बंद आखों की रौशनी है ख़ामोशी
ठंडी हवा का रोमांच है ख़ामोशी
दिलासे का स्पर्श है ख़ामोशी
हर इन्सान का कर्ज है ख़ामोशी
आज ईमान का फर्ज है ख़ामोशी
माँ की दुआ है ख़ामोशी
पिता का दर्द है ख़ामोशी
तेरे मेरे रिश्ते का नाम है ख़ामोशी
मेरी जिन्दगी का ईनाम है ख़ामोशी..!!

- वीरेन्द्र प्रताप सिंह